उड़ान

सुखिया अब कौवों को उचरा-उचरा कर थक चुकी थी. सुबह घर-आँगन बुहारते समय जैसे ही किसी कौवे की काँव-काँव सुनती, झाड़ू छोड़कर, कौवे की ओर मुखातिब होकर, उससे बतियाने लगती.

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