Literature and Ecosystem (साहित्य और पारिस्थितिकी)

हमने कालांतर में नारी प्रधान समाज , पुरुष प्रधान समाज और ना जाने कितने ही प्रधानता से भरे समाजों की संकल्पना कर ली है । प्रकृति हाशिए पर बैठी कब से हमें इशारा कर रही थी कि हमारी ये सारी संकल्पनाएँ समावेशी नहीं हैं ।

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