राष्ट्रीय आय से सम्बन्धित अवधारणायें (Related Concepts of National Income)

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आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन, व्यक्तिगत अथवा सूक्ष्म स्तर (micro level) पर, या सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर (macro level) पर किया जाता है. व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन व्यष्टि अर्थशास्त्र (Microeconomics) कहलाता है, जबकि समष्टि अर्थशास्त्र (Macroeconomics) के अन्तर्गत, सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर पर, आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है.

राष्ट्रीय आय (National Income) का अध्ययन समष्टि अर्थशास्त्र (Macroeconomics) का एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है. राष्ट्रीय आय का स्तर किसी देश के आर्थिक विकास के स्तर को प्रदर्शित करता है. आये दिन हम समाचार पत्रों तथा न्यूज़ चैनल डिबेट्स में इसके ऊपर चर्चायें सुनते रहते हैं. ये डिबेट्स सरकार को बनाने और बिगाड़ने का माद्दा रखते हैं, इसलिये इसके महत्त्व के बारे में यहाँ अतिरिक्त चर्चा की ज़रूरत नहीं है.

राष्ट्रीय आय को समझने के लिये राष्ट्रीय आय से सम्बन्धित अवधारणाओं (concepts); जैसे कि, जी. डी. पी. (Gross Domestic Product), जी. एन. पी. (Gross National Product), एन. एन. पी. इत्यादि को भली-भाँति समझना ज़रूरी है.

आय का चक्रीय प्रवाह (Circular Flow of Income)

इन अवधारणाओं को अच्छी तरह समझने के लिये आय के चक्रीय प्रवाह (Circular Flow of Income) को समझना ज़रूरी है, जिसे हम कुछ इस प्रकार से समझ सकते हैं — उत्पादन के विभिन्न साधनों (means of production) के पारस्परिक सहयोग से उत्पादन कार्य सम्पन्न होता है, तथा इससे उत्पादन में संलग्न साधनों को प्रतिफल प्राप्त होता है; जैसे, भूमि को लगान, श्रम को मज़दूरी या वेतन, पूँजी को ब्याज तथा साहसी को लाभ.

व्यावसायिक फ़र्में इन उत्पादन साधनों के सामूहिक उपयोग से वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करती है. उत्पादन साधनों (means of production) के स्वामी, केवल साधन पूर्तिकर्त्ता (supplier) ही नहीं होते, वरन् ये साथ-साथ उपभोक्ता (consumer) भी होते हैं. इस तरह वे साधनों से अर्जित आय को उपभोग (consumption) पर खर्च करते हैं. दूसरे शब्दों में, व्यावसायिक फ़र्मों को वस्तुओं (goods) तथा सेवाओं (services) की बिक्री से जो आय प्राप्त होती है, उस आय को वे पुनः वस्तुओं तथा सेवाओं के पुनरुत्पादन के लिये उत्पादन के साधनों पर खर्च करते हैं. इस प्रकार देश की अर्थव्यवस्था (national economy) में आय का प्रवाह चक्रीय (circular flow of income) होता है.

उत्पादन की प्रक्रिया के अन्तर्गत, वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रवाह (flow of goods and services) के फलस्वरूप, साधन आय का सृजन होता है. इस तरह से; उत्पादन आय को, आय व्यय को, फिर व्यय उत्पादन को, तथा उत्पादन पुनः आय को जन्म देता है. इस प्रकार उत्पादन प्रक्रिया के अन्तर्गत सृजित आय की व्याख्या आय के चक्रीय प्रवाह के रूप में की जा सकती है. इसी प्रकार आर्थिक क्रियाओं का यह चक्र अनवरत चलता ही रहता है.

यहाँ, आय के चक्रीय प्रवाह से अभिप्राय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में मौद्रिक आय के प्रवाह, या, वस्तुओं और सेवाओं के चक्रीय रूप में प्रवाह से है (it refers to the flow of money income or the flow of goods and services across different sectors of the economy in a circular form). इस प्रवाह को आय का चक्रीय प्रवाह इसलिये कहा जाता है, क्योंकि, इस प्रवाह का ना कोई आरम्भ बिंदु होता है और ना ही कोई अन्त बिन्दु.
यहाँ तक हमने राष्ट्रीय आय से सम्बन्धित अवधारणाओं को समझने के लिये ज़रूरी “आय के चक्रीय प्रवाह” की अवधारणा को भली-भाँति समझ लिया है, इसलिये दूसरे चरण में हम राष्ट्रीय आय से सम्बन्धित अवधारणाओं को समझने की कोशिश करेंगे, जिसके बाद, अन्ततः हम पूरी राष्ट्रीय आय को समझने में सफल हो सकेंगे.

जी. डी. पी. अथवा सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product)

राष्ट्रीय आय (National Income) से सम्बन्धित विभिन्न अवधारणाओं (concepts) को समझने की शुरुआत हम जी. डी. पी. (Gross Domestic Product) को समझने से करेंगे, जो कि किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य का द्योतक माना जाता है.

एक लेखा वर्ष (accounting year) में, किसी देश की घरेलू सीमा (domestic territory) के अंदर, समस्त उत्पादनों के द्वारा जितनी भी अन्तिम वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन होता है (जिसमें मूल्य ह्रास भी शामिल किया जाता है), उन वस्तुओं तथा सेवाओं की बाज़ार क़ीमतों (market price) के योग को, बाज़ार क़ीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP at the Market Price, या, GDP MP) कहा जाता है.

कुछ उत्पादक ग़ैर-निवासी या विदेशी भी हो सकते हैं; उदाहरण के लिये, भारत में कई विदेशी बैंक तथा विदेशी कम्पनियाँ कार्यरत है जिनके द्वारा हमारे देश में वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन होता है. इनके द्वारा की गयी मूल्य वृद्धि भी भारत के घरेलू उत्पादन में जोड़ी जाती है. इस प्रकार एक लेखा वर्ष (accounting year) में किसी देश की घरेलू सीमा (domestic territory) के अंदर सभी उत्पादकों (सामान्य निवासी तथा ग़ैर-निवासी) के द्वारा जितनी भी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन होता है, इनकी बाज़ार क़ीमत (market price) के जोड़ को, बाज़ार क़ीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP MP) कहा जाता है (Gross Domestic Product is the market value of the final goods and services produced during an accounting year within the domestic territory of a country).

सकल घरेलू उत्पाद की विशेषतायें (Features of Gross Domestic Product)

  1. इसमें केवल देश की घरेलू सीमाओं में उत्पादित वस्तुओं तथा सेवाओं को ही सम्मिलित किया जाता है.
  2. यह उत्पादनों के सकल मूल्य का माप प्रस्तुत करता है. यहाँ सकल (gross) शब्द इसलिये जोड़ा गया है, क्योंकि, मूल्य ह्रास (Depreciation) या स्थिर पूँजी पदार्थों के उपभोग (Consumption of Fixed Capital) का मूल्य भी शामिल होता है.
  3. सकल घरेलू उत्पाद में केवल अंतिम वस्तुओं व सेवाओं (final goods and services) के मूल्य की गणना की जाती है; इसलिये, इसमें कच्चे माल, बिजली, ईंधन इत्यादि जैसी मध्यवर्ती वस्तुओं (intermediary goods) के मूल्यों को शामिल नहीं किया जाता है.
  4. इसमें मौलिक उत्पादन नहीं बल्कि उत्पादित वस्तुओं व सेवाओं के बाज़ार मूल्य को शामिल किया जाता है.
  5. सकल मूल्य वृद्धि को एक लेखा वर्ष के लिये आकलित किया जाता है.
  6. इसका मापन प्रचलित क़ीमतों पर किया जाता है. यदि हम साल 2021 का GDP ज्ञात करना चाहते हैं, तो उसमें बस साल 2021 में ही उत्पादित वस्तुएँ तथा सेवाएँ शामिल की जाएँगी, ना कि साल 2020 की; भले ही, इनकी बिक्री साल 2021 में ही क्यों ना हो रही हो.

जी. एन. पी. अथवा सकल राष्ट्रीय उत्पाद (Gross National Product)

हम यहाँ GNP MP अर्थात् बाज़ार क़ीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (Gross National Product at Market Price) पर चर्चा करेंगे. सकल राष्ट्रीय उत्पाद की अवधारणा केवल एक देश की घरेलू सीमा के अन्तर्गत सामान्य निवासियों द्वारा उत्पादित अन्तिम उत्पाद के मूल्य से ही सम्बन्धित नहीं है, बल्कि, इसमें विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय को भी शामिल किया जाता है. इस तरह से, market price पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद एक देश की घरेलू सीमा में सामान्य निवासियों द्वारा एक accounting year में उत्पादित final goods तथा services के बाज़ार मूल्य एवं विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय का जोड़ है.

विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय क्या है?

विदेशों से शुद्ध साधन आय एक देश के सामान्य निवासियों द्वारा दूसरे देशों को अपनी साधन सेवाएँ व सम्पत्ति प्रदान करने के बदले प्राप्त आय (लगान, मज़दूरी, ब्याज तथा लाभांश), और इस देश की घरेलू सीमा में विदेशियों द्वारा प्रदान की गयी सेवाओं के बदले में दी गयी आय के अन्तर के बराबर होता है. विदेशों से शुद्ध साधन आय धनात्मक या ऋणात्मक हो सकती है. यदि विदेशों से शुद्ध साधन आय धनात्मक होती है, तो सकल राष्ट्रीय उत्पाद, सकल घरेलू उत्पाद से, अधिक होता है. इसके विपरीत, यदि विदेशों से शुद्ध साधन आय ऋणात्मक होती है, तो सकल राष्ट्रीय उत्पाद सकल घरेलू उत्पाद से कम होता है.

विदेशों से शुद्ध साधन आय ( Net Factor Income from Abroad) के घटक:

  1. कर्मचारियों की शुद्ध क्षतिपूर्ति (Net Compensation of Employees) — निवासी श्रमिकों, विदेशों में अस्थायी रूप से काम करने वालों को मिलने वाली क्षतिपूर्ति एवं देश की घरेलू सीमा के अंदर काम करने वाले अस्थायी श्रमिकों को मिलने वाली क्षतिपूर्ति का difference कर्मचारियों का Net Compensation कहलाता है.
  2. सम्पत्ति तथा उद्यमिता से प्राप्त शुद्ध आय(Net Income from Property and Entrepreneurship other than Retained earnings of Resident Companies of Abroad) — एक देश के निवासियों द्वारा लगान, ब्याज, लाभ इत्यादि के रूप में प्राप्त आय तथा शेष विश्व को किये गये इसी प्रकार के भुगतान का अन्तर सम्पत्ति तथा उद्यमिता से प्राप्त शुद्ध आय कहलाता है.
  3. विदेशों में निवासी कम्पनियों द्वारा शुद्ध प्रतिधारित आय (Net Retained Earnings of Resident Companies Abroad) — विदेशों में स्थित निवासी कम्पनियों की प्रतिधारित आय तथा देश की घरेलू सीमा के अन्दर स्थित विदेशी कम्पनियों की प्रतिधारित आय का difference शुद्ध प्रतिधारित आय को बताता है.

एन. एन. पी. अथवा शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (Net National Product)

अब हम बाज़ार क़ीमत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (Net National Product at Market Price) को देखेंगे. Production process में प्रयुक्त होने वाले वाले पूँजीगत यन्त्र धीरे-धीरे घिसते रहते हैं, तथा कुछ मशीनें तथा यन्त्र अप्रचलित हो जाते हैं. इसलिये सकल राष्ट्रीय उत्पादन का कुछ हिस्सा घिसे तथा अप्रचलित यन्त्रों को बदलने में खर्च हो जाता है. अतः यदि सकल राष्ट्रीय उत्पाद में से मूल्य-ह्रास या घिसाई व्यय को हटा दें तो विशुद्ध राष्ट्रीय उत्पादन (NNP) प्राप्त होता है. इसे ही ‘बाज़ार मूल्य पर राष्ट्रीय आय’ (National Income at Market Price) भी कहा जाता है.

घिसावट व्यय के घटक (Features of Depreciation Expense)

  1. सामान्य टूट-फूट (Normal Wear and Tear) — इनमें वे खर्च सम्मिलित हैं जो निरन्तर उत्पादन के दौरान स्थायी पूँजी की घिसावट के कारण करने पड़ते हैं.
  2. अप्रचलन (Obsolescence) — इससे अभिप्राय उन ख़र्चों से है जो उत्पादकों को पूँजीगत मशीनों के पुराने पड़ने पर उनके स्थान पर नयी मशीनों के प्रयोग करने के कारण करने पड़ते हैं.
  3. मशीनों की आकस्मिक हानि (Accidental Breakdown of Machinery) — इसमें production process के दौरान होनेवाले मशीनों के ब्रेकडाउन आदि पर होनेवाले व्यय को शामिल किया जाता है.

एन. डी. पी. अथवा शुद्ध घरेलू उत्पाद (Net Domestic Product)

N. D. P. — अब हम बाज़ार क़ीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (Net Domestic Product at Market Price) की चर्चा करेंगे. बाज़ार क़ीमतों पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDP MP) का अभिप्राय एक वर्ष में एक देश की घरेलू सीमाओं में निवासियों द्वारा उत्पादित अन्तिम वस्तुओं एवं सेवाओं के मौद्रिक मूल्य से है, जिसमें से स्थिर पूँजी (fixed capital) के उपभोग (consumption) को घटा दिया जाता है. अतः बाज़ार क़ीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (G.D.P. MP) और बाज़ार क़ीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (N.D.P. MP) में केवल इतना ही अन्तर है कि बाज़ार क़ीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP MP) में घिसावट व्यय (depreciation expense) भी सम्मिलित होता है, जबकि बाज़ार क़ीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDP MP) में depreciation expense शामिल नहीं होता. इस प्रकार “बाज़ार क़ीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद” एक देश की घरेलू सीमा में सामान्य निवासियों तथा तथा ग़ैर-निवासियों द्वारा एक लेखा वर्ष में उत्पादित अन्तिम वस्तुओं तथा सेवाओं के बाज़ार मूल्य के बराबर है, जिसमें से घिसावट मूल्य को घटा दिया जाता है.

डॉ अनिता सिन्हा

अध्यक्ष (अर्थशास्त्र विभाग)

भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, बिहार.

Summary
राष्ट्रीय आय से सम्बन्धित अवधारणायें (Related Concepts of National Income)
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राष्ट्रीय आय (National Income) का अध्ययन समष्टि अर्थशास्त्र (Macroeconomics) का एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है. राष्ट्रीय आय का स्तर किसी देश के आर्थिक विकास के स्तर को प्रदर्शित करता है. आये दिन हम समाचार पत्रों तथा न्यूज़ चैनल डिबेट्स में इसके ऊपर चर्चायें सुनते रहते हैं.
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अनकही

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Harindra Himkar

साहित्यिक गतिविधियाँ : अज्ञेय की संस्था ‘वत्सल निधि’ से सम्बद्ध, जय-जानकी जीवन यात्रा का सहभागी. भारत-नेपाल की अनेकों भोजपुरी पत्र-पत्रिकाओं में रचना प्रकाशित. हिन्दी बालगीत ‘प्यारे गीत हमारे गीत’ प्रकाशित. हिन्दी तथा भोजपुरी भाषा में नियमित लेखन. कविताओं तथा गीतों का एक संकलन प्रकाशन की प्रतीक्षा में. प्रज्ञा-प्रतिष्ठान नेपाल, नेपाल भोजपुरी समाज तथा हिन्दी साहित्य समाज के कार्यक्रम में नियमित सहभागिता. हिन्दी तथा भोजपुरी पत्रिकाओं का सम्पादन. भारतीय राजदूतावास, नेपाल की साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का नियमित सहयोगी-सहभागी. बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय में हिन्दी तथा भोजपुरी भाषा साहित्य विषय पर शोध का निर्देशन. नेपाल के भोजपुरी भाषा और साहित्य विषय पर शोध का निर्देशन. अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन का स्थायी सदस्य.

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